प्रभु आपकी शरण में हूँ , रक्षा कीजिए।

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॥ राम॥

प्रभु आपकी शरण में हूँ , रक्षा कीजिए। एक समय जीवन में में लोगों की दिशा परिवर्तित करने वाला कहलाया करता था ,आपकी कृपा ऐसी थी। अब मेरे जीवन की दिशा स्वयं समझ नहीं पा रहा। जीवन प्रपंच लग रहा है जिसमे में फंसते जा रहा हूँ।

प्रभु दया करें। जिन माता-पिता-गुरु के लिए जीवन समर्पित करने का प्रण था, उनके लिए ही में समस्या बन रहा हूँ। पारिवारिक जीवन में जीवनसाथी का वैमनस्य, प्रेम, कपट, क्रोध, प्रतिशोध से माता-पिता-गुरु के लिए जीवन में कुछ नहीं कर पाया तो ये जीवन की अंतिम इच्छा ही रह जाएगी प्रभु।

आपके गुरु सूर्य देव को समर्पित माणिक जड़ित स्वर्ण मुद्रिका 11 मई 2016 (अक्षय तृतीया ) के दिन गुम हो जाने के बाद जैसे कि इंद्र देव ने सरे दुर्भाग्य एक
साथ देना प्रारम्भ कर दिए हैं। हर समस्या का कारण मेरे पिछले पाप कर्म ही हैं। दोषी यहाँ परमात्मा को नही ठहराता

प्रभु असुरो का कब्ज़ा मेरी देह, मन पर भी बढ़ता जा रहा है। त्राहि माम.... ! अपराध चित्त ना धरे राम प्यारे। मुझ मूढ़मति पर दया करें।

ध्याने नित्यं महावीरम वायुसुतम अपराजितम्, रामभक्तं प्रियं देवं शिवातारम् हनुमन्तनम्

दयानिधि करुणासिंधु रामदासम् जितेन्द्रियं, भक्ति मुक्ति प्रदे स्वामी अंजनिनंदम नमाम्यहम्।

॥ दशरथनंदनपरमदास ॥